उम्मीद…Umeed Poem by Senior Citizen

Vijay Pathik Gulati is a Senior Citizens who got inspired to pick up the pen again to express his thoughts as a poem and we at Aam Press are very happy to provide him a platform !

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दवाएं लेता लेता थक गया हूँ

अब दुआओं की दरकार है ।

निभाई जिम्मेदारियां अब

जिन्दगी आराम की तलबगार है ।

कोशिश है अभी कुछ कर गुजरूं

बस इक मौके का इंतजार है ।

बैठ बैठ कर उठने की कोशिश है

गिर न जाऊं ये डर सताता है

आंधियां हैं तूफान भी साथ है

इन्हे रोकता हूँ थामता हूँ

बस अब यही सिलसिले वार है ।

जीत जाऊं ये आखिरी जगं भी

बस यही उम्मीद बरकरार है ।।

~ विजय पथिक गुलाटी

6 COMMENTS

  1. Sir my village in Assam Silchar Barkhol Anwerpar.my no 7795696513 आपका नंबर दीजिए मुझे नहीं तो इसी नंबर में आप एक बार मुझे कॉल कीजिए सर आपका साथ बहुत जरुरी मेरा थोड़ा बात करना है. Please sir#Aam press

  2. हेल्लो सर नमस्कार मैं रांची झारखंड से हूँ । मैं श्री श्री रविसंकर का जो बयान है उसपे बात करना चाहता हूं उन्होंने एक बात बोले कि अगर राम मंदिर हल नही हुआ तो सिरिया बनाने की धमकी देता है ऐसा बोलने का आजादी कौन देता है। और ये किसको डरा रहा है । कोई कानून बयस्था है कि नही इस देश में अगर मुसलमानों को डरा रहे हो तो सुन ले श्री श्री रविसंकर जी मुसलमान सिवाय अल्लाह से डरता और किसी से नही डरता ।और रॉबिनहुड सर जी मैं आपसे रिक्वेस्ट करता हु की इस बात को लाइव फेसबुक पर लेके आएं । और प्लीज़ भारत को सिरिया न बनाये अगर आग लगेगी तो मैं भी जलूँगा आप भी जलोगे तो ऐसे बयान देने वालो पे करवाई हो। मैं आम प्रेस का बहुत बड़ा फैन हूँ। प्लीज़ सर जी इस मैटर में लाइव जरूर आइयेगा।
    धन्यवाद

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