एक कविता किसान के कलम से

इतनी मेहनत से उगाई फसलें...तो फसलों को रेट चाहिए...!! अन्नदाता बने कैसे कोई जग का...सबसे पहले भरना परिवार का पेट चाहिए...!!

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पहले समस्याएं उत्पन्न कर दीं..!!
देकर राहतें ….फिर उनको थोड़ा कम कर दी…!!
ये किस राह पे देश धकेल दिया मोदी जी
की सब राहें ही खत्म कर दी…!!
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बाजारों में सन्नाटा है..!!
खाली हुआ घर किसान के भी आटा है..!!
नोटबन्दी के बाद भला
कैसे कोई gst भर पाता है…!!
चूरन वाले नोटों से
लगता नही गाँधी जी का नाता है
व्यापारी लौटते हैं घरों में खाली जेब
और खाली हाथ किसान घर आता है..!!

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बस्तियाँ अमीरों की
और भी सम्पन्न कर दी…!!
ये किस राह पे देश धकेल दिया मोदी जी
की सब राहें ही खत्म कर दी…!!

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बीज को ऊपर अपने रेत चाहिए…!!
पलने को नस्लें, उगने को फसलें
पास किसान के खेत चाहिए..!!
इतनी मेहनत से उगाई फसलें
तो फसलों को रेट चाहिए…!!
अन्नदाता बने कैसे कोई जग का
सबसे पहले भरना परिवार का पेट चाहिए…!!
इन गरीबों से मोदी जी gst आपको
और वसुंधरा को वेट चाहिए…!!
चेत जाइये जी चेत जाइये…!!
Written By ~ रवि सुथार Ravi Suthar
राजस्थान के एक किसान A Farmer from Rajasthan

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